संयुक्त अरब अमीरात के अजमान में शिक्षा की विरासत स्थापित करने वाले अग्रदूत
लज़ार ग्रुप और नॉर्थ पॉइंट एजुकेशन ग्रुप ऑफ स्कूल्स अपने प्रिय संस्थापक श्री डैनियल लज़ार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं। वे एक अभियंता, उद्यमी, शिक्षाविद् और दूरदर्शी व्यक्तित्व थे, जिनके जीवन और कार्यों ने संयुक्त अरब अमीरात के उत्तरी अमीरातों के शैक्षिक परिदृश्य को बदल दिया। उनका जाना नॉर्थ पॉइंट एजुकेशन परिवार के लिए एक ऐसे आत्मीय मार्गदर्शक की कमी है, जिनकी स्मृतियाँ उनके कार्यों के साथ जुड़ी रहेंगी।
8 अप्रैल 1968 को पुणे के एक युवा अभियंता ने टाटा कंपनी की अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़कर गुजरात से एक छोटी नाव में संयुक्त अरब अमीरात की साहसिक यात्रा शुरू की। अरब सागर में दस दिनों की जोखिम भरी यात्रा के बाद वे खोर फ़क्कान के तट पर पहुँचे। अनिश्चितता, कठिनाइयों और आस्था से भरी यह यात्रा उनके जीवन की दिशा तय करने वाली थी। इसी साहसिक समुद्री यात्रा से एक ऐसे उल्लेखनीय जीवन की शुरुआत हुई, जो कड़ी मेहनत, सेवा और किफ़ायती तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के संकल्प को समर्पित था, ताकि अजमान के प्रत्येक बच्चे की पहुँच उत्कृष्ट शिक्षा तक हो सके।
यूएई पहुँचने के बाद श्री डैनियल ने विद्युत क्षेत्र में काम करना शुरू किया। उन्होंने अथक परिश्रम किया और अपनी ईमानदारी, अनुशासन तथा समर्पण से अपने आसपास के लोगों का सम्मान अर्जित किया। हालाँकि, उनकी पेशेवर सफलता केवल शुरुआत थी। उनका सबसे बड़ा सपना आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ सार्थक स्थापित करना था। उनके इन सपनों ने लज़ार ग्रुप और विशेष रूप से आज के नॉर्थ पॉइंट एजुकेशन के रूप में आकार लिया, जिसकी नींव मूल्यों, ज्ञान और मानवता पर रखी गई। बच्चों के बेहतर भविष्य के प्रति उनकी यह प्रतिबद्धता उनके जीवन के उद्देश्य को एक गहरा मानवीय अर्थ देती है।
शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति में गहरे विश्वास से प्रेरित होकर उन्होंने लज़ार ग्रुप की स्थापना की और उस संस्था की नींव रखी, जो आज नॉर्थ पॉइंट एजुकेशन ग्रुप ऑफ स्कूल्स के नाम से जानी जाती है। इस समूह के अंतर्गत तीन विद्यालय हैं—द रॉयल एकेडमी, अजमान; द ब्लूमिंगटन एकेडमी, अजमान; और द होप इंग्लिश स्कूल, शारजाह।
उनका मानना था कि शिक्षा केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य मूल्यों और चरित्र का विकास करना तथा अवसर प्रदान करना भी है। वे अक्सर कहा करते थे, “बच्चों को पढ़ाने से मुझे खुशी मिलती है। उन्हें सफल व्यक्तियों के रूप में विकसित होते देखना मेरे जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार है।” यही विश्वास उनके द्वारा स्थापित संस्थानों का मार्गदर्शक सिद्धांत बना, जिसने दशकों के दौरान हज़ारों विद्यार्थियों, परिवारों और शिक्षकों के जीवन को प्रभावित किया। विद्यार्थियों की सफलता में अपनी खुशी खोजना उनके शिक्षा के प्रति प्रेम और आने वाली पीढ़ियों के प्रति लगाव की सहज अभिव्यक्ति थी।
यूएई के प्रति श्री डैनियल की कृतज्ञता जीवनभर अटूट रही। जिस देश ने उनका स्वागत किया, वही उनका घर बना और वहीं उनके सपने साकार हुए। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से वहाँ के समुदायों की सेवा में अपना जीवन समर्पित करके उस विश्वास का प्रतिदान दिया। युवाओं के लिए उनका संदेश सरल था, “पूरे जुनून के साथ अपने सपनों को साकार करने का प्रयास करें। ईमानदारी और समर्पण से काम करें। सफलता आपके पीछे आएगी।”
श्री डैनियल लज़ार आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके मूल्य, उनकी दूरदृष्टि और शिक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उनके द्वारा स्थापित संस्थानों के माध्यम से विकसित हुए प्रत्येक विद्यार्थी, सशक्त हुए प्रत्येक शिक्षक और बदले हुए प्रत्येक जीवन में उनकी विरासत जीवित है।
श्री डैनियल लज़ार की पारिवारिक विरासत उनके पुत्र और समूह के अध्यक्ष श्री लैंसन लज़ार तथा उनकी पुत्री सुश्री लिन्सी लज़ार के रूप में आगे बढ़ रही है तथा उनके सपनों को साकार करने का प्रयास अविरत कर रहे हैं।
आज यह विरासत उनके पुत्र श्री लैंसन लज़ार के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है, जो नॉर्थ पॉइंट एजुकेशन ग्रुप ऑफ स्कूल्स के अध्यक्ष हैं। वे शैक्षिक उत्कृष्टता, सत्यनिष्ठा और सेवा के प्रति उसी प्रतिबद्धता के साथ अपने प्रिय पिता की दूरदृष्टि को आगे ले जा रहे हैं। आशा और दृढ़ संकल्प के साथ यूएई पहुँचे उस युवा अभियंता का सपना आज भी भविष्य सँवार रहा है और अनगिनत लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।
संस्थापक श्री डैनियल लज़ार के निधन के बाद नॉर्थ पॉइंट एजुकेशन समुदाय के विभिन्न वर्गों से श्रद्धांजलि संदेश प्राप्त हुए हैं। द रॉयल एकेडमी की प्रधानाचार्या डॉ. प्रेमा मुरलीधर ने उन्हें केवल संस्थापक ही नहीं, बल्कि पिता तुल्य व्यक्तित्व के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय के प्रति उनका प्रेम कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। इन शब्दों में उनके प्रति सम्मान के साथ उस आत्मीय रिश्ते की गहराई भी झलकती है, जिसे उन्होंने विद्यालय समुदाय के साथ बनाया था।
द रॉयल एकेडमी की वरिष्ठ शिक्षिका सुश्री कृपालता ने अपने तीन दशकों के अनुभवों को याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी दूरदृष्टि ने शिक्षा और मूल्यों के माध्यम से विद्यार्थियों की कई पीढ़ियों को सँवारा है।
सुश्री अस्मा होस्नी ने उनकी व्यवहारकुशलता, सत्यनिष्ठा, निष्ठा और मानवता को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उस आत्मीयता को याद किया, जिसके साथ श्री डैनियल ने नॉर्थ पॉइंट एजुकेशन परिवार में उनका स्वागत किया था।
द ब्लूमिंगटन एकेडमी की प्रधानाचार्या सुश्री हुसैना बेगम नूर शरीफ़ ने उन्हें ऐसे दूरदर्शी व्यक्तित्व के रूप में सम्मानपूर्वक याद किया, जिनकी शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता ने अनगिनत बच्चों और परिवारों के लिए अवसर पैदा किए। वहीं, द होप इंग्लिश स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. टेरी बर्वेल ने कहा कि उनकी विरासत संस्थानों और इमारतों से कहीं आगे तक फैली हुई है।
द येलो बस की टीम के सदस्यों ने उन्हें एक विनम्र और करुणाशील नेतृत्वकर्ता के रूप में याद किया, जो सभी के साथ समान सम्मान और आत्मीयता से व्यवहार करते थे। आरजीएमसी के सदस्यों ने उन्हें पिता तुल्य व्यक्तित्व बताया, जो व्यक्तिगत कठिनाइयों के समय उनके साथ खड़े रहे और हमेशा प्रोत्साहन, स्नेह तथा अटूट सहयोग देते रहे।
श्री डैनियल लज़ार ने अनगिनत लोगों के जीवन पर बहुत प्रभाव डाला है। वे अपने पीछे सेवा, करुणा और शैक्षिक उत्कृष्टता की एक स्थायी विरासत छोड़ गए हैं। नॉर्थ पॉइंट एजुकेशन परिवार उनके जीवन और योगदान को कृतज्ञतापूर्वक नमन करता है। बच्चों के भविष्य में उनकी आस्था और लोगों के प्रति उनका स्नेह उनकी स्मृति को सदा आदर के साथ जीवित रखेंगे।